100 दिनों की रोजगार गारण्टी योजना कांग्रेस की देन यह भी देश में पहली बार हुआ, खाद्य सुरक्षा अधिनियम देश में पहली बार आया, सूचना अधिकार अधिनियम देश में पहली बार आया, स्वास्थ्य बीमा योजना जो कि एनआरएचएम के तहत् जिसकी शुरूआत हुई वह भी देश में पहली बार हुआ, शिक्षा का अधिकार कानून आया वह भी देश में पहली बार हुआ। यदि इतिहास के पन्नों को पलटिये तो आप पायेंगे कि इस देशको जो कुछ भ्ीा मिला अधिकतर कांग्रेस के शासनकाल में मिला है और देश को पहली बार मिला है, इससे पहले अंग्रेजों ने तो दिया नहीं था, ऐसे में ये पहली बार- पहली बार की लड़ाई यदि दोनों पार्टियों में चले तो भाजपा तो 10 प्रतिशत के बराबर भी नहीं है।
वर्तमान में देश के पास एक ऐसा प्रधानमंत्राी है जो बड़ा ही आत्ममुग्ध है। जैसा वह स्वयं हर काम को पहली बार बताने की चेष्टा में लगे रहते हैं, वैसे ही उनके चाहने वाले जिन्हें लोग अब अंधभक्त कहने लगे हैं वे भी उन चिजांे को लेकर फेसबुक, वाट्सअप एवं अन्य सोशल मिडिया में लगातार पोस्ट करते रहते हैं। जैसा नेता आत्मुग्ध और मन के अलावे किसी की भी बात नहीं सुनने वाला वैसा ही उसके चमचे किस्म के लोग भी मेरे मुर्गी के तीन टांग, तीन टांग रटते रहते हैं, आप उन्हें सही चिजें बताते थक जायंेगे, लेकिन वे आपकी बातों को सुनना पसंद नहीं करेंगे, यदि आपने कुछ ज्यादा हिम्मत दिखायी तो यकिन मानिये आपके लिये देशद्रोही का सर्टिफिकेट तुरंत ही जारी कर दिया जायेगा, पाकिस्तान का टिकट नहीं कटता बाकि जो कसर हो सब पुरा कर दिया जाता है। यह भक्तों की गलती नहीं है, यह गलती उस नेतृत्वकर्ता की जो कि स्वयं भी लगातार झूठ बोलता चला जा रहा है और दूसरों को भी 100 झूठ, हजार झूठ बोलने के लिये तैयार कर रहा है।
क्या देश मेें पहली बार सर्जिकल स्ट्राईक हुआ, क्या नोटबंदी से देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई, क्या कालेधन 100 दिनों में वापस आ गये, क्या पेट्रोल और डिजल के दामों में कमी हो गई, क्या पाकिस्तान से एक जवान के बदले दस सिर लाये जा रहे हैं या फिर आप लाहौर में बैठ कर बिरयानी खां रहे है? ऐसे कई सवाल है जो केवल मैं नहीं बल्कि देश का एक बड़ा तबका प्रधानमंत्राी जी से पुछना चाहता है, लेकिन सवाल यह है कि वह आखिर पूछे कैसे? प्रधानमंत्राी जी मन की बात करते तो हैं किन्तु जनता के मन की बात सुनना पसंद नहीं करते। यह देश का लोकतंत्रा नहीं है, आप विदेशों में जाते हैं हजारों की भीड़ एकत्रित कर लोगों से सवाल-जवाब करते हैं, महोदय वहीं कार्य आप देश के अंदर क्यों नहीं करते। देश भर में घुम-घुम कर बिना ट्रक-बस में लोगों की ढो कर भीड़ इक्ट्ठा किये बिना, खुद से आये लोगों के बीच में बैठ कर आप उनकी मन की बात सुनना पसंद क्यों नहीं करते?
विगत दो दिनों से वाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर और अन्य सोशल मिडिया पर भाजपा द्वारा पोस्ट किये जा रहे हैं, बहनों को मिला इंसाफ, देश में पहली बार किसी सरकार ने बहनों के लिये बनाये कड़े कानून। स्वागत है इन कानूनों का, कानून सिर्फ बने नहीं, बल्कि उसका पालन हो, वर्षों तक मामला लंबित होने के बजाये, उस पर त्वरित फैसला हो तभी न्याय सही होगा, अन्यथा कई वर्षों बाद मिला हुआ न्याय, न्याय नहीं रह जाता। जो लोग फेसबुक, वाट्सएप, ट्वीटर पर देश में पहली बार पोस्ट डाल रहे हैं, उनसे अनुरोध है कि कृपया कभी इतिहास के पन्नों को पलट कर पढ़ने की कोशिश किजिये हिन्दी वालों के लिये हिन्दी और अंग्रेजी वालों के लिये अंगे्रजी में इतिहास के पन्नों में बहुत कुछ दर्ज है, जो पहली बार, पहली बार की रट आप लगाये हुए हैं, उनसे निवेदन है कृपया याद करें दामिनी मामले वह केस जब देश में पहली बार बहुत कुछ हुआ और कई कानून बनें। याद किजिये उसी दामिनी केस के बाद महिला बैंक की स्थापना भी की गई थी, किन्तु इसी भाजपा की सरकार ने उस महिला बैंक का स्टेट बैंक में विलय कर दिया, किन्तु नारी अस्मिता और सम्मान की बात करने वाले किसी भाजपा नेता ने यह नहीं कहा कि दामिनी मामले के बाद इस बैंक की स्थापना की गई थी, यदि इसे बंद नहीं किया जाता तो अच्छा होता। यह वहीं भाजपा है जिसके विधायक और भाई पर बलात्कार के आरोप लगे और यूपी में तथाकथित रामराज लाने वाले मुख्यमंत्राी योगी ने पिड़िता की एक न सुनी, उल्टे पिड़िता के पिता की वहां की सरकार के इशारे पर थाने में हत्या हो गई, क्या इसे भी सार्वजनिक करेंगे कि देश में पहली बार रेप पिड़िता के पिता को थाने में मार दिया गया। क्या आप यह भी देश को बताना चाहेंगे की तथाकथित रामराज में रेप के आरोपी को सरकार से सभी संसाधनों ने मिल कर बचाने का प्रयास किया।
क्या भाजपा के फेसबुक, ट्वीटर एवं अन्य सोशल मिडिया के महारथी देश को यह बतायेंगे कि देश में पहली बार भाजपा की छ.ग. की राज्य सरकार ने एक युवती को नक्सली बताकर मारा और फिर उसकी मौत पर मुआवजा एवं उसके परिजन को नौकरी की घोषणा भी कर दी। जबकि युवती के साथ पुलिस वालों ने रेप किया और फिर गोली मारी और बचने के लिये नक्सली घोषित कर दिया। इसे भी पहली बार कह कर क्यों प्रचारित नहीं किया जाता। क्या यह भी देशवासियों को बताना चाहेंगे कि भाजपा की छ.ग. सरकार के संरक्षण में सैकड़ों बहनों के गर्भाष्य निकाल लिये गये, नसबंदी आॅपरेशन के दौरान कई की मौत हो गई, यह भी देश में पहली बार भाजपा के शासन में हुआ। किन्तु नहीं अपनी हर गलती को आप ढकना चाहते हैं, आप जनता के सवालों से बचना चाहते हैं, जनता से दूर भागना चाहते हैं। यदि आप वास्तव में बहनों की इज्जत करते, वास्तव में उनके सम्मान की बात करते तो सबसे पहले छत्तीसगढ़ की उन बहनों के मामलों में आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाते जो कि मिना खलखो, सोनी सोरी, गर्भाष्य काण्ड एवं नसबंदी काण्ड के प्रमुख आरोपी हैं। किन्तु आपने तो उन्हें संरक्षण देना सही समझा क्योंकि आप हर काम पहली बार करना चाहते हैं और उसे प्रचारित करना चाहते हैं।
आज भाजपा के जो लोग नारी सम्मान और अस्मिता की बात कर रहे हैं, जो लोग कानून को देश में पहली बार कह कर प्रचारित कर रहे हैं और मोदी को शेर बता रहे हैं, उनसे मेरा सवाल है क्या सोनी सोरी के गुप्तांगों में जब कंकड़ ठूंस दिये गये, उसे आरोपी साबित करने तमाम तरह के कृत्य किये गये, कम से कम आप की राष्ट्रवादी अस्मिता इस बात पर तो जागती कि ठीक है आरोपी है भी तो इसके गुप्तांगों के साथ इस तरह का कृत्य न किया जाये। देश देखता है, देश समझता है और फिर चुपचाप शांत हो जाता है और जब उत्तर देता है तो फिर पहली बार शब्द का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। भाजपा से जुड़े हुए बहुत सारी नेत्रियां मोदी को शेर बताते हुए, देश में पहली बार बताते हुए कई पोस्ट कर रही हैं, उनसे सवाल है जब आसिफा का मामला शुरू हुआ तब आपने यह पोस्ट क्यों नहीं डाला कि एक रेप के आरोपी को बचाने मंत्राी मंडल सड़क पर उतर आया, देश को क्यों नहीं बताया कि भाजपा में पहली बार रेप के आरोपी के बचाने की मंत्राी वकालत कर रहे हैं, यूपी में आरोपी विधायक एवं भाई को बचाने भाजपा के लोग रैली निकालते हैं, तब भाजपा के सोशल मिडिया के शुरवीर यह क्यों नहीं बताते कि देश में पहली बार तथाकथित रामराज में रेप के आरोपी को बचाने पुरा मंत्राी मंडल एक साथ है। नारी अस्मिता और सम्मान की बात करने वाले लोग केवल झूठ और भ्रम क्यों पैदा करते हैं। क्यों गलत चिजों को प्रसारित करना चाहते हैं, समझ से परे है। ऐसा लगने लगा है कि आत्ममुग्ध प्रधानमंत्राी को पाकर भाजपा को फाॅलो करने वाले लोग खुद में इस तरह से आत्ममुग्ध हो चुके हैं कि उन्हें अब सही गलत में फैसला कर पाने की समझ ही नहीं रही।
ये भाजपा के तथाकथित सोशल मिडिया एक्टीविस्ट ऐसे ऐसे पोस्ट डालते हैं समझ में ही नहीं आता कि ये लोग यह सब सिखते कहां से हैं, आज ही छ.ग. भाजपा आईटी सेल की एक पोस्ट देख रहा था, जिसमें उन्होंने वन अधिकार पट्टे के बारे में पोस्ट किया है, जिसमें लिखा है 2003 में कांग्रेस शासन काल में शून्य प्रकरण, भाजपा ने 2017 तक 3.35 लाख परिवारों को वन अधिकार मान्यता पत्रा बांटे। आईटी सेल के उन ज्ञाताओं को बताना चाहिए कि भाई साहब वन अधिकार अधिनियम 2006 में देश में लागू हुआ तो कांग्रेस 2003 में अधिकार पत्रा बांटती कैसे? यह आत्ममुग्धता की हद नहीं है तो और क्या है। एक दिन ऐसा ही पोस्ट छ.ग. सरकार के एक मंत्राी ने किया भारत के बाहर किसी दूसरे देश का फोटा डालकर उसे छत्तीसगढ़ का बता दिया। ऐसे पोस्ट से सामान्य तौर पर आप क्या अंदाजा लगा सकते, केवल यही न कि काम जीरो और बात हिरो की। मतलब करो कुछ मत लेकिन लोगों के बीच येनकेन प्रकारेण भ्रम की स्थिति निर्मित कर दो।
मुझे सोशल मिडिया पर आजकल के विशेष किस्म के भक्तों के साथ बहस करने पर तब बहुत मजा आता है, जब उनसे आप पुछिये कि भाई साहब कालाधन कब आयेगा, मोदी तो शेर हैं, वे 100 दिन में लाने को बोले थे, तब ये भक्त किस्म के लोग नियम और कानूनों को हवाला देते हैं, तब मेरा सवाल रहता है कि क्या मोदी चुनाव के वक्त अनपढ़ थे, जो उन्हें नियम व कानूनों का ज्ञान नहीं था और आज हो गया। तब ये भक्त ऐसे बिदकते हैं जैसे किसी ने सांप के पूंछ पर पैर रख दी, आप इनसे पुछिये भाई साहब अब तो देश के अधिकतर राज्यों में राष्ट्रवादी सरकार है राममंदिर कब बनेगा, ये आपको उच्चतम न्यायालय का हवाला देते हैं, किन्तु चुनाव के समय उच्चतम न्यायालय से भी आगे जाकर ये भाषण देते हैं कि हमारी सरकार राम मंदिर बनवायेगी। चुनाव के समय ये कहते हैं हम आयें तो पाकिस्तान को लव लेटर भेजना छोड़, एक सिर के बदले 10 सिर लायेंगे, आज स्थिति यह है कि लव लेटर के साथ-साथ गुलाब और गिफ्ट लेकर भी ये खुद ही डेटिंग पर पहुंच जा रहे हैं। किसानों की बात करने वाले आज किसानों की समस्या को भाषणों में ही समाप्त कर चुके हैं। अब तो मुझे यकिनन विश्वास हो चुका है कि वाकई में जिस तरह से चुनाव के वक्त झूठ बोला गया, जरूर साक्षर और अनपढ़ वाला कोई भेद है, तभी तो आज तक सर्टिफिकेट भी सही नहीं मिले। खैर, ईश्वर ऐसे लोगों को जल्द से जल्द ज्ञान दे कि ये सही रास्ते पर आ जायें, नहीं तो देश की जनता देश में पहली बार ऐसा कुछ जायेगी जो कि इनके समझ से बाहर हो जायेगा।
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