शनिवार, 16 सितंबर 2017

महिलाएं हमारे घरों में कितना सम्मानित हैं.... रैली में नारा लगाने के पूर्व यह जरूर सोचें। : क्या प्रधानमंत्री को झूठ बोलने की आज़ादी है?

 क्या प्रधानमंत्री को झूठ बोलने की आज़ादी है?: क्या प्रधानमंत्री को झूठ बोलने की छुट है? जैसे-जैसे राष्ट्रवादी सरकार के 5 वर्ष पुरे होने को हैं, लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे ...

क्या प्रधानमंत्री को झूठ बोलने की आज़ादी है?

क्या प्रधानमंत्री को झूठ बोलने की छुट है?

जैसे-जैसे राष्ट्रवादी सरकार के 5 वर्ष पुरे होने को हैं, लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। खुद मैं भी कई सवालों को लेकर असमंजस में रहता हूं और मैं चुनाव के पूर्व के प्रधानमंत्री उम्मीद्वार के वायदों से ज्यादा चुनाव के बाद देश के प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से बोले गये झूठ और झूठे वायदों को लेकर यह सोचता हूं कि क्या प्रधानमंत्री को झूठ बोलने की आज़ादी है? 
जेएनयू में आज़ादी के नारे लगाये जाते हैं, इन युवाओं को आज़ादी मिली या नहीं इस पर फिर कभी चर्चा करेंगे, किन्तु 2014 के आमसभा चुनाव ने नरेन्द्र मोदी को एक आज़ादी दे दी और वह था, झूठ बोलने की आज़ादी। पिछले तीन वर्षों में उनके द्वारा दिये गये भाषणों पर यदि हम चर्चा करेंगे तो देश के सामने एक झूठा प्रधानमंत्री खड़ा मिलेगा, किन्तु मैं पिछले एक वर्ष के कुछ भाषणों पर आमजनों की बीच चर्चा करना चाहता हूं। 8 नवम्बर का वह दिन, जब एक  व्यक्ति ने तमाम इलेक्ट्रॉनिक चैनलों एवं रेडियो के माध्यम से यहां कहा कि भाईयों और बाहनों आज आधी रात से आपके हाथ में पड़ा 500 और 1000 का नोट केवल कागज टूकड़ा है और इसकी वैधता समाप्त कर दी गई है तो मानों हर एक शक्स के पैरों तले जमीन खिंसक गई, चाहे वह गरीब परिवार रहा हो, अथवा मध्यमवर्गीय परिवार, परिवार का हर एक सदस्य इस सोच में था कि मैंने परिवार के सदस्यों से चोरी-छूपे 500 और 1000 के जो नोट छूपाये हैं क्या वह वास्तव में अब केवल कागज का टूकड़ा रह गया है।  बैकों में लगने वाली लम्बी लाईन और कई तरह की समस्याओं के बावजुद लोगांे ने कथित देशभक्त प्रधानमंत्री के इरादों को पुरा करने में पूर्ण सहयोग किया और नोटबंदी को सही बताया, क्योंकि इससे कालाधन समाप्त होने वाला था, क्यों कि इससे आतंकवाद एवं नक्सलवादी गतिविधियों पर लगाम लगने वाली थी। समय बढ़ता गया, लोगों की समस्याएं भी बढ़ती रही, लेकिन कभी किसी ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री जी से नहीं की क्यों कि देश बदलाव चाहता था, क्योंकि देश अच्छा दिन देखना चाहता था। 
इस बीच देश के प्रधानमंत्री जी ने कई भाषण दिये और कई तरह के आरोप विपक्षी दलों से लेकर देश एवं विश्व स्तर के अर्थशास्त्राीयों एवं विद्वानों पर लगाये। प्रधानमंत्री जी ने अपने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए बाकि सभी को झुठा बतलाया। उन्होंने यहां तक कहा कि विपक्षी दल जो 60 वर्षों में देश का विकास नहीं कर सकी वे अब कालाधन रखने वालों की वकालत कर रही है। 
प्रधानमंत्री जी ने एक चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि हार्वड वालों पर हार्ड वर्क वाले भारी पड़ गये और उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं विश्व के जाने में अर्थशास्त्राी डॉ. मनमोहन सिंह सहित अमर्त्य सेन एवं कई अन्य लोगों का सार्वजनिक तौर पर माखौल उड़ाया और सरकार के फैसले को सही करार दिया। देश के प्रधानमंत्री ने एक भाषण के दौरान ड्रामा करते हुए रोने सी आवाज़ निकाल कर कहा कि भाईयों बहनों मैंने देश के लिये अपना घर-परिवार सब छोड़ दिया, मुझे केवल 50 दिन चाहिए, यदि देश में बदलाव न आया, नोटबंदी का उचित परिणाम न निकला तो आप देश के जिस चौराहे पर जो सजा देना चाहेंगे मैं भुगतने को तैयार हूं किन्तु मुझे 50 दिन दीजिये। 
देश के प्रधानमंत्री नोटबंदी के पहले दिन से अंतिम तक लगातार जनता से झूठ बोलते रहे, अपने फैसले को सही बताते रहे, किन्तु अंत में परिणाम क्या आया, नोटबंदी से देश को फायदा होना छोड़ घाटा हुआ, जो कि लम्बे समय तक बरकरार रहेगा। ऐसे में मेरा देश के प्रधानमंत्री से यह सवाल है कि चुनाव के बाद प्रधानमंत्री के रूप में पद सम्हालते हुए आपने शपथ लिया था, उसमें क्या बातें आपने बोली थीं, ज़रा याद करें आप लगातार जनता से झूठ बोलते जा रहे हैं, आपको तो पद की गरिमा का ख्याल रखते हुए माफी मांग कर अपना बड़प्पन दिखाना चाहिए, कम से कम अपने झूठ के लिये देशवासियों से न सही उन अर्थशास्त्राी पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी एवं अमर्त्य सेन जी सहित अन्य विद्वानों से तो माफी मांग लें जिनका आपने एक सार्वजनिक सभा में माखौल उड़ाया था। 
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आप जिस पद पर हैं उससे देश की गरिमा जुड़ी हुई है, आप अभी चुनावी सभा नहीं कर रहे, आप जो बोलते हैं अब प्रधानमंत्री की हैसियत से बोलते हैं, अपने स्क्रीप्ट राईटर को बोलें कि कम से कम प्रधानमंत्री पद के अनुरूप भाषण तैयार करे, चुनाव के दौरान जनता से झूठ बोलने वाले फेकूं नेता की तरह नहीं। प्रधानमंत्री देश के प्रमुख विभाग के सर्र्वे सर्वा आप हैं, आप तक यह बात तो जरूर पहुंचती होगी अप्रैल से जून की तिमाही में आर्थिक विकास दर 5.7 फीसदी रह गई है जो कि गत 3 वर्षों में सबसे कम है। आप तक यह बात भी पहुंचती होगी कि नोटबंदी के शुरूआत 3-4 महिनों में ही लोगों की 15 लाख से अधिक नौकरियां समाप्त हो गई,  लोग बरोजगार हो गये और यह आंकड़ा लगातार बड़ता चला जा रहा है। असंगठित क्षेत्रा में आज भी रोजगार की स्थिति दयनीय है, कई छोटे उद्योग तो एक वर्ष होने को हैं अब तक प्रारंभ नहीं हो सके हैं, कईयों ने हमेशा-हमेशा के लिये ताला लगा दिया है। कृषि क्षेत्रा में भी स्थिति सुधर नहीं रही है, इसके बावजुद आप जनता के बीच झूठ बोलते हैं, झूठ प्रचारित करते हैं। यह सब आप कैसे कर लेते हैं? नोटबंदी में तमाम समस्या के बावजुद आप डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस की किमतों में वृद्धि कर लगातार जनता के ऊपर बोझ बढ़ाते जा रहे हैं। वह आप ही थे न जिन्होंने नसीब की बात की थी कि यदि मोदी के अच्छे नसीब से पेट्रोल-डीजल के दाम घटते हैं तो फिर देश को नसीब वाला प्रधानमंत्री चाहिए या बदनसीब प्रधानमंत्री।
 मोदी जी आप कभी किसी परिवार का अंग बन कर देखिये कि किसी परिवार में यदि शादी-विवाह जैसा आयोजन होता है तो उस परिवार में रूपये कि अहमियत कितनी होती है और आप विदेश में जाकर देश की जनता का यह माखौल उड़ाते हैं कि परिवार में शादी है लेकिन पैसे नहीं, ताली बजाकर हंसते हैं, क्या यह एक देश के प्रधानमंत्री पद की गरिमा है। जनसेवक वह होता है जो जनता की समस्याओं के लिये तत्पर रहे, वह नहीं जो उसकी समस्याओं पर ताली पिटे। आप कहते हैं 60 सालों में पूर्ववर्ती सरकारों ने क्या किया? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी 60 वर्षों में पूर्ववर्ती सरकारों ने जनता को इस काबिल बना दिया कि टी.वी., वाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर और अन्य सोशल मिडिया पर चलने वाले भ्रमित विज्ञापनों को देख कर एक झूठ की सरकार देश में बना डाली। आपके सरकार को 4 वर्ष पूर्ण होने वाले हैं, प्रधानमंत्री जी हर वर्ष जब आपकी सरकार पूर्ण करती है तो आपकी पार्टी तमाम तरह की जश्न घुम-घुम कर मनाती है, मेरा आपसे आग्रह है कि इस बार जब 4 वर्ष पूर्ण हो तो बिना किसी जश्न के अपने सांसदों को, अपने मंत्रियों को, अपने पार्टी के नेताओं को बिना किसी लाव-लश्कर के जनता के बीच भेज कर उनकी समस्याएं जानने की कोशिश किजियेगा, न कि अपने झूठ को प्रचारित करने के लिये करोड़ों रूपये कार्यक्रम के नाम पर फूंक दीजियेगा। आपके पास तो आरएसएस जैसी संगठन है जिसके लोग हर गली-मुहल्ले में फैले हुए हैं, उन्हें तो देश की सच्चाई और सरकार के प्रति लोगों में रोष साफ-साफ दिखता होगा, वे लोग आप तक बात पहुंचाते भी होंगे, फिर आप इतना झूठ बे-झिझक कैसे बोल लेते हैं। 
आप देश के प्रधानमंत्री हैं, आप को कई लोग फॉलो करते हैं, कई के रोल मॉडल भी आप हैं, यदि आप लोगों के बीच में झूठ बोलेंगे तो देश के युवाओं को क्या सीख देंगे, उन्हें आप झूठ बोलना सीखा रहे हैं। आपको देश को बदलने के लिये प्रधानमंत्री बनाया गया है, आपको आज़ादी मिली हुई है कि आप अपने स्वपन अपनी योजनाओं के अनुसार देश में बदलावा लायें, न कि आपको झूठ बोलने की आज़ादी दी गई है? झूठ तो हर कोई कहीं न कहीं बोलता है लेकिन कुछ पदों की गरिमा होती है, यह अब आपको तय करना है कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा क्या होनी चाहिए? 
अंचल ओझा, अम्बिकापुर